Wednesday, 25 January 2017

तलाश-ऐ-यार

ज़िन्दगी  जो  गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर 
कुछ  लोगो  ने  वाजिब  कहा, तो  कुछ  ने  आवारगी  से  नवाज़  हमको 

इम्तिहान-ऐ-सब्र भी  और  गम-ऐ-दिल  को  खुशामदिन 
चर्चा-ऐ-यार  और  शेखी  मोहोब्बत  की 
कभी  हम  गुमशुदा  तो  कभी  ये  दिल  गुमशुदा 
हर  जगह  होती  बातें  ग़ुरबत  की 

ज़िन्दगी  जो  गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर 
कुछ  लोगो  ने  वाजिब  कहा, तो  कुछ  ने  आवारगी  से  नवाज़  हमको 

न हसीं  सवेरे  की  कहानी, न  ढलते  शाम  का  किस्सा 
सबकी  जुबां  पर  सिर्फ  हमारे  नाम  का  किस्सा 
कोई  समझता  सोहरत-ऐ-इश्क़, कुछ  ने  मजहब-ऐ-दिल  कहा  इसको 
किसी  की  निग़ाह में  नफरत-ऐ-आंसू, किसी  में  खुसी  का  खज़ाना 

ज़िन्दगी  जो  गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर 
कुछ  लोगो  ने  वाजिब  कहा, तो  कुछ  ने  आवारगी  से  नवाज़  हमको 

दो  पहलू  दिखे  इस  मोहोब्बत  के  हमको 
अच्छी और  बुराई  दोनों  से  पला  पड़ा 
कुछ  ने  डराया  हमें  सूली  का नाम  ले कर 
कुछ  ने  हमें  शक्श-ऐ-बुज़दिल कहा 

ज़िन्दगी  जो  गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर 
कुछ  लोगो  ने  वाजिब  कहा, तो  कुछ  ने  आवारगी  से  नवाज़  हमको 

अरमान-ऐ-दिल  कुछ  बैरंग मिले  थे 
कुछ  खुवाइशों  का  जैसे  इंतकाल  हुआ 
गुनाह-ऐ-खास  था  ये  सबकी  नज़र  में 
कुछ  का  फैसला  हमारे  हक़  में  हुआ 

ज़िन्दगी  जो  गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर 
कुछ  लोगो  ने  वाजिब  कहा, तो  कुछ  ने  आवारगी  से  नवाज़  हमको..................!!

D K

Tuesday, 24 January 2017

वादा न सही मगर, एक इंसा को बचाने के लिए आ……..

वादा न सही मगर, एक इंसा को बचाने के लिए आ 
के एक बार मिल कर मुझ से, फिर बिछड़ जाने के लिए आ
मुमकिन है अब ये होश भी साथ ने दे मेरा 
मुझ बेहोश पर एक चादर चढ़ाने के लिए आ
कुछ तो मेरे पाक-ऐ-मोहोब्बत की जूनून को समझ 
के कभी तो तू भी मुझको मानाने के लिए आ
जनता हू अब वो रिस्ता-ऐ-रस्म-ऐ-दिल नहीं है 
खैर एक नया रिश्ता ही बनाने के लिए आ
किस किस को बताऊ मैँ, इस दिल के किस्से को 
तू मेरे लिए न सही, इस ज़माने के लिए आ
यकीं-ऐ-चिराग अब भी जल रहा है मेरे सीने मैँ 
एक आखरी अहसान कर, इसको बुझाने के लिए आ………………….!!
D K

बरसने के बाद…………

हो गयी रुकसत घटा बरसने के बाद
खिला मौसम नया बरसने के बाद
मेरे गमो से रूबरू हो कर ये हवा भी
जोर से बहने लगी बरसने के बाद
होता आमना-सामना कुछ पल के लिए ही 
दिल-ऐ-खुवाईश बनी ये बरसने के बाद
मेरी तन्हाईयों को देखने के बाद 
मेरी उदासी कुछ बोली बरसने के बाद
उस चाँद को अकेला देख आसमा में
एक तारा रो दिया बहुत बरसने के बाद
चला जा रहा था मैँ अकेला ही उन रास्तो पर
सरे पत्थड़ नर्म पड़ गए बरसने के बाद
गीले कपड़ों पर नज़र पड़ी मेरी 
रो पड़ा दिल मेरा बरसने के बाद
लिखा एक पन्ने पर मैंने उसका नाम 
कलम भी रो पड़ी बरसने के बाद
चलो ये दिन भी याद रहेगा मुझ को इसलिए भी
कोई बहुत याद आया था बरसने के बाद……………………………..!!
D K